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रूढ, यौगिक और योगरूढ़ शब्द

हिन्दी में शब्दों को रचना के आधार पर रूढ शब्द, यौगिक शब्द और योगरूढ़ शब्द में बांटा जा सकता है।

रूढ, यौगिक और योगरूढ़ शब्द

रूढ शब्द

ऐसे शब्द जो वर्णों के योग से बने सामान्य शब्द हों, लेकिन जिनको वर्णों या खंडों में तोड़ने पर उनके वर्णों या खंडों का कोई अर्थ नहीं हो, रूढ शब्द कहलाते हैं।

जैसे – जल, नल, कर, पर आदि

आप ऊपर दिये गए शब्दों में पाएंगे की इन शब्दों को तोड़ने पर ‘ज’, ‘ल’, ‘न’ आदि का कोई अर्थ नहीं है।

यौगिक शब्द

यौगिक शब्द दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों के योग से बने होते हैं।

जैसे – राजकमल (राज + कमल), सपूत (स + पूत), सज्जन (सत + जन) आदि

ऊपर दिये गए शब्दों में आप पाएंगे कि ये शब्द सार्थक शब्दों के योग से बने हैं। जैसे राज + कमल = राजकमल

योगरूढ़ शब्द

योगरूढ़ शब्द यौगिक शब्द ही होते हैं पर इनका अर्थ शाब्दिक ना होकर विशेष हो जाता है।

जैसे- नीलकंठ, पीताम्बर आदि

आप देखेंगे कि नीलकंठ ‘नील’ और ‘कंठ’ से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ होगा ‘नीले गले वाला’, परंतु नीलकंठ विशेष अर्थ के रूप में शंकर जी के लिए प्रयोग होता है।

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